गुमियापाल-बड़ेपल्ली के इलाके में सोमवार को जिन ग्रामीणों को नक्सलियों ने पीटा, उन्हें देर शाम तक पुलिस अस्पताल लेकर पहुंची। एसडीओपी देवांश सिंह राठौर ने ग्रामीणों के जख्मों पर दवाई लगाई। पुलिस को दिए बयान में ग्रामीणों ने बताया कि श्यामगिरी आंदोलन में शामिल नहीं होने से नक्सली नाराज थे। जनअदालत लगाई गई थी। जहां ग्रामीण और पीछे नक्सली मौजूद थे। पिटाई की, जान से मारने का फरमान सुनाया जा रहा था। मुखबिरी के आरोप लग रहे थे। लेकिन सभी ग्रामीणों ने कहा कि हम गांव में नहीं रहेंगे। नक्सलियों ने भी यही शर्त रखी कि दोबारा गांव में न दिखें और उन्हें छोड़ दिया।
अब 4 परिवारों के 20 से ज्यादा सदस्यों को मजबूरन गांव छोड़ना पड़ा। अभी ये सभी किरंदुल में हैं। जिनके दवाई, खाने-पीने व रुकने का इंतज़ाम पुलिस ने किया है। जिन परिवारों ने गांव छोड़ा है ये सभी डीआरजी जवानों
के रिश्तेदार हैं। एसपी डॉ अभिषेक पल्लव ने इस पूरी घटना की निंदा की और कहा कि कार्रवाई होगी। किरंदुल एसडीओपी देवांश सिंह राठौर ने बताया कि नक्सलियों की पिटाई से जख्मी सभी ग्रामीणों की हालत अभी थोड़ी ठीक है। ग्रामीण पुलिस से जुड़ रहे हैं ऐसे में नक्सली बौखलाए हैं।

पहले भी ग्रामीणों की पिटाई कर चुके हैं नक्सली
नक्सलियों द्वारा डीआरजी जवानों के परिवारों की पिटाई, हत्या और उन्हें गांव से बेदखल करने का यह पहला मामला नहीं है, बल्कि इसके पहले भी कई मामले सामने आया चुके हैं। गुमियापाल के रहने वाले डीआरजी जवान अजय के पिता की नक्सली पहले भी पिटाई कर चुके हैं।

इस गांव के कई युवा पुलिस में काम कर रहे
गुमियापाल गांव के कई युवा पुलिस के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं। इस इलाके में लगातार पुलिस को नक्सलियों के एनकाउंटर, गिरफ्तारी को लेकर भी काफी सफलता मिली है। नक्सलियों ने सरेंडर भी किया है।



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Naxalites beat up more than 20 family members of jawans in Gumiyapal area, left on condition of leaving village


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